Oh, mind in knots, a tangled thread,
With choices swirling in your head.
To step or stay, a heavy plight,
Beneath the sun or in the night.
But hush, my soul, the worried cry,
Let every anxious thought drift by.
No need to bear this heavy load,
Upon this winding, earthly road.
For in the cosmos, high and vast,
A gentle whisper is cast.
"Surrender now, let go of all,
And heed my comforting call."
एकं ब्रह्म द्वितीय नास्ति नेह ना नास्ति किंचन: ब्रह्म ज्ञान का मूल मंत्र एवं सूक्ष्म बोल आलाप
सूक्ष्म बोल आलाप ब्रह्म - परम सत्य सृष्टि - का , अस्तित्व - का आधार - है ब्रह्म - निर्गुण - है , निराकार - है अनन्त - सत्य - है , अनन्त - चित - है , अनन्त - आनन्द - है। ब्रह्म शुद्ध - अस्तित्व - है , शुद्ध - चेतना - है जो अपरिवर्तनीय - है , जो - शाश्वत - है , जो - सर्वव्यापी - है। आत्मा - ब्रह्म - का - ही एक - अंश जन्म - मरण - से - परे , आत्मा शरीर - बदलती - है . इहलोक माया - है , भ्रम - है अविद्या - है , मिथ्या - ज्ञान - है , तम - है ब्रह्मविद्या परम - विज्ञान - है , पूर्ण - ज्ञान - है। अंतर्ज्ञान , संपूर्ण - अनुभव जीवन - लक्ष्य - है मोक्ष माया - से मुक्ति - है , विद्या - प्रकाश - है , ब्रह्म-ज्ञान- है , आत्मा - ब्रह्म-का - मिलन - है
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