भोग और संग्रह त्याग बनाये निडर, सहज, सरल: हाइकु
हाइकु :
भोग-जगत - /
धन-औ-वस्तु संग्रह -
हैं रक्षा भ्रम
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जग जकडे /
बनाए ऐसा दास /
जो डरा-डरा
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भौतिक जीव /
बना मूढ, अज्ञानी /
भूल आत्मा को
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बन निडर
तज भोग, हो योगी /
हो आत्मा-स्तिथ
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तज संग्रह /
हो सरल, सहज, /
आत्म-निर्भर
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