Message of Dussehra in Hindi Poem

 


Message of Dussehra in Hindi Poem

 सत्य सदा ही जीते जग में, असत्य की हो हार यहाँ,
जीवन उत्सव बन जाए अब, खुशियाँ बिखरे द्वार यहाँ।
काम, क्रोध और मद को त्यागें, मोह-लोभ को दूर करें,
ईर्ष्या, द्वेष, छल, हठ को छोड़ें, आलस को हम चूर करें।

दस बुराइयाँ ये जीवन का, पथ अवरोधक बनती हैं,
इनके कारण ही बाधाएँ, नित्य हृदय को डसती हैं।
सत्य मार्ग पर चलकर साथी, अपना लक्ष्य बनाएँ हम,
नेक राह पर डटे रहें सब, मान-मर्यादा पाएँ हम।

विजय सत्य की ही है निश्चित, सत्य ही बलवान रहे,
असत्य मिटेगा, सदा सत्य का, ऊँचा ही सम्मान रहे।
पर्व बने जीवन की हर पल, हर्षित मन संसार रहे,
दसों विकार जो भीतर पलते, उनका ही संहार रहे।

Comments

Popular posts from this blog

An ink attack at Jantar Mantar and aftermath

Nanak Naam Jahaz...Gurbani Shabad: Lyrics and Inspired Decastich