जैन धर्म में मन पर विजय प्राप्त करना: निर्वाण मार्ग का तप
जैन धर्म में मन पर विजय प्राप्त करना: निर्वाण मार्ग का तप
चंचल मन डोले, इन्द्रियों के वश,
सुख आनंद खोया, जीवन ये बेबस।
कर्मों से ढका है, शुद्ध मन का धाम,
समझते हैं जो हम, है वो भिन्न परिणाम।
निज मन पर जीत, है साहस महान,
विजयी वो वीर, पायेगा सुख का दान।
इंद्रियों पर विजय, पराक्रम वीरता,
पाना मुक्ति, यही है सच्ची स्थिरता।
इन्द्रियों पर पाना विजय, है पराक्रम,
वीरता यही, जो मन को वश में करे।
मुक्त हो उलझन से, पाएँ निज स्वरूप,
शुद्ध मन की ज्योति, सदा ही जगमगे।
मन जीते तो जग जीते, कर्मों का बंधन टूटे।
मन की अशांति दूर भगे, मोक्ष का द्वार खुले।
तपस्या यही सच्ची, कषायों को हराना।
मन को वश में रखना, मुक्ति का रास्ता पाना।
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