ज्ञान को चरित्र में बदलें



 ज्ञान को चरित्र में बदलें 

ज्ञान जो तुमने पाया, उसे कर्म में ढालो,
सिर्फ़ सोच के मत बैठो, उसे व्यवहार में लाओ।
जो ज्ञान क्रियामय होगा, वही तेरा चरित्र बनेगा,
व्यक्तित्व तेरा सँवारेगा, जीवन को सफल करेगा।

कोरा ज्ञान तो बस, एक बौद्धिक विलास है,
बिना कर्म के जीवन में, कहाँ कोई विकास है।
ज्ञान को, विचारों को, आचार सम्पन्न बनाओ,
जो मन में ठानी है, उसे अब करके दिखाओ।

जो सोचा है, उसे ही तो चरितार्थ करना है,
आचरण में लाकर, हर विचार को भरना है।
जब सोच और करनी, एक राह पर चलें,
तभी जीवन सफल होगा, सब मनोरथ फलें।

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