पर्युषण पर्व या दस लक्षण धर्म का जैन त्योहार शरीर, इंद्रियों और मन को शुद्ध करने के लिए है
पर्युषण पर्व या दस लक्षण धर्म का जैन त्योहार शरीर, इंद्रियों और मन को शुद्ध करने के लिए है ~ब्लॉग लेखक: डॉ ललित किशोर (Speaking Tree) हर साल जैन त्यौहार पर्युषण पर्व या दस लक्षण धर्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में 8-10 दिनों तक ध्यान, उपवास और प्रार्थना के साथ मनाया जाता है, जिसका समापन संवत्सरी या क्षमावाणी - क्षमा दिवस के साथ होता है। त्यौहार के आखिरी दिन अनुयायी 'मिच्छामि दुक्कड़म!' या "मुझे माफ़ कर दो!" का आदान-प्रदान करते हैं, जिसका अर्थ है कि मेरे सभी गलत कामों को मिटा दिया जाए ताकि एक नई शुरुआत या नवीनीकरण हो सके। भाद्रपद का पूरा महीना व्रत, पूजा-पाठ और शास्त्र पठन-पाठन में व्यतीत होता है। ऐसा माना जाता है कि उपवास शरीर और मन को शुद्ध करता है और त्याग और तपस्या पर जोर देता है। कुछ भक्त तो 31 दिनों तक उपवास या 'मास्कमण' भी करते हैं और केवल उबला हुआ पानी पीकर अपना गुजारा करते हैं। दस लक्षण धर्म के लिए, त्योहार के दौरान निम्नलिखित दस 'पवित्र गुणों' पर विचार किया जाता है और उनका अभ्यास किया जाता है •उत्तम क्षमा या...